आपका मार्केट मैट्रिक्स ब्लॉग में स्वागत है। इस आर्टिकल में हम स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट में पी.ओ.आई क्या है, खरीदने और बेचने के लिए कौन से पी.ओ.आई बना सकते हैं और आर्डर ब्लॉक क्या है? इन सभी के बारे में जानेंगे
सामग्री की तालिका |
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1. "स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट" क्या है? |
2. पी.ओ.आई क्या है? |
3. खरीदने और बेचने के लिए पी.ओ.आई. |
4. आर्डर ब्लॉक क्या है? 5. कौन सा सबसे अच्छा है, प्राइस एक्शन या एसएमसी? |
1. "स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट" क्या है?
जैसा कि आपको पता होना चाहिए, फादर ऑफ़ टेक्निकल एनालिसिस डोव थ्योरी को कहा जाता है और उन्होंने ही स्मार्ट मनी कांसेप्ट की खोज की और उन्होंने हमें एक थ्योरी दी कि जब भी प्राइस ट्रेंड में मूव करता है, तो एक पैटर्न बनता है, चाहे वह अप ट्रेंड हो या डाउन ट्रेंड हो।
ऐसी कैपिटल जिसका इनफ्लो मार्किट में इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर, बैंक, फंड हाउसेस, प्रॉप डेस्क इनकी वजह से हो रहा हो, इसे "स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट" कहा जाता है। प्राइस एक्शन स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट का ही हिस्सा है।
अगर देखा जाये तो सपोर्ट या रेजिस्टेंस ब्रेक आउट स्मार्ट मनी कांसेप्ट जैसा ही लगता है इसके अंदर पांच चीजें आती हैं।
- बी.ओ.एस. (ब्रेक आउट ऑफ़ स्ट्रक्चर)
- सी.एच.ओ.सी.एच (चेंज ऑफ़ करैक्टर)
- सप्लाई जोन
- डिमांड जोन
- एफ.भी. जी ( फेयर वैल्यू गैप )
ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर क्या होता है?
अपट्रेंडिंग या बुलिश मार्केट में जब भी पिछले हाई को तोड़कर मार्केट एक हायर हाई बनाता है, उसे ब्रेकआउट स्ट्रक्चर कहा जाता है इससे मार्केट का ट्रेंड और सपोर्ट का भी पता लगता है।
बी.ओ.एस. के संरचना के हिसाब से, हम खरीद की एंट्री ले सकते हैं क्योंकि यह पैटर्न बुलिश मार्केट को दर्शाता है और जब तक ऐसा पैटर्न बना रहता है, हम ट्रेड में खरीद की ओर बने रह सकते हैं।
चेंज ऑफ़ करैक्टर
अगर मार्केट ने पिछले हाई और हाईर लो के ट्रेंड को तोड़ दिया है, तो वह चेंज ऑफ़ करैक्टर कहलाता है और इससे पता चलता है कि मार्केट में खरीदारी कम होनी शुरू हो गई है।
चेंज ऑफ करैक्टर जैसे कि इसके नाम से ही पता लग रहा है, मार्केट के स्ट्रक्चर में बदलाव हमें बेयरिश का संकेत देता है और बताता है कि अगर आपने बुलिश में ट्रेड ले रखा है तो एग्जिट ले लें क्योंकि यहां से मार्केट गिर सकता है।
सप्लाई जोन
जब मार्केट लो बनाता है, फिर हाई बनता है, फिर उसी जोन से लो बनता है। तब उस जोन को सप्लाई जोन कहा जाता है।एक सप्लाई जोन करंट प्राइस से ऊपर स्थापित होता है, जहां मजबूत सेलिंग करने के लिए ट्रेडर्स की रुचि होती है, सप्लाई के तुलना में बायर्स की जगह सेलर्स अधिक हो जाते हैं और प्राइस कम हो जाता है। और ट्रेडर्स आम तौर पर सेलिंग शुरू कर देते हैं, जैसे कि चार्ट पर देख सकते हैं।
यह हमें रेजिस्टेंस लाइन ड्रा करने में मदद करता है और इससे हमें पता चलता है कि यहां ट्रेंड बदलने वाला है और सेलिंग शुरू होने वाली है।
डिमांड जोन
जब कभी कोई शेयर हाई बनाकर लो बनाता है और फिर उसी जोन से लो से हाई बनाता है, तब उस जोन को डिमांड जोन कहा जाता है।
डिमांड जोन करंट प्राइस जोन से नीचे का करंट एरिया है जहां मजबूत बायर्स इंटरेस्ट है। सेलर्स की तुलना में खरीदारों की संख्या अधिक होती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। डिमांड जोन में अधिक बायर्स इंटरेस्ट होते हैं, जिससे इस एरिया में बड़े ऑर्डर्स होने की संभावना हो सकती है।
यह हमें सपोर्ट लाइन ड्रा में मदद करता है और इससे हमें पता चलता है कि यहां ट्रेंड बदलने वाला है और खरीदारी शुरू होने वाली है।
फेयर वैल्यू गैप
जब मार्केट स्ट्रॉंग मूवमेंट के साथ अप साइड या डाउन साइड जाता है और हमें थ्री कैंडल के बीच में गैप दिखता है, उस गैप को हम फेयर वैल्यू गैप कहते हैं। फेयर वैल्यू गैप को इंबैलेंस एफिशियंसी भी कहते हैं।
जब भी मार्केट में स्ट्रांग मूवमेंट दिखता है, इसका मतलब वहां मार्केट में स्मार्ट मनी इंवॉल्व है। जब भी मार्केट में फेयर वैल्यू गैप बनता है, तो मार्केट उस गैप फील करने जरूर आता है।
2. पी.ओ.आई क्या है?
- पी.ओ.आई का पूरा नाम पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट होता है।
- चार्ट में ऐसा कोई एरिया या पॉइंट जहाँ हमें अवसर मिलता है खरीदने या बेचने का, वहाँ हम पी.ओ.आई बनाते हैं। उसी को पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट कहा जाता है।
3. खरीदने और बेचने के लिए पी.ओ.आई
खरीदना | बेचना |
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जब मार्केट का स्ट्रक्चर अपट्रेंड में होता है, तब हम पी.ओ.आई बनाते हैं ताकि हम खरीदारी कर सकें। | जब मार्केट का स्ट्रक्चर डाउनट्रेंड में होता है, तब हम बेचने के लिए पी.ओ.आई बनाते हैं। |
डिमांड एरिया, सपोर्ट, बुलिश आर्डर ब्लॉक अपट्रेंड में पी.ओ.आई बना सकते हैं। | सप्लाई एरिया, रेजिस्टेंस, बेयरिश आर्डर ब्लॉक आदि पी.ओ.आई बना सकते हैं। |
4. आर्डर ब्लॉक क्या है?
आर्डर ब्लॉक एक पर्टिकुलर एरिया होता है जहां हम मानते हैं कि मार्केट में बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशन, बैंक, उनके आर्डर वहां लगे हैं और मार्केट जब उस आर्डर को ग्रेब करता है और वहां से मार्केट स्थापित होता है, तो उस एरिया को आर्डर ब्लॉक कंसीडर करते हैं। जहां से मार्केट में तेजी आई होती है।
आपको एक बात ध्यान रखनी है, अगर बुलिश कैंडल है तो इंस्टीटूशन, बैंक्स उसमें सेल करेंगे और बेयरिश कैंडल है तो वे उसमें खरीदेंगे। दो टाइप्स के आर्डर ब्लॉक होते हैं.
- क्लासिक आर्डर ब्लॉक
- अल्गोरिथ्मिक आर्डर ब्लॉक
5. कौन सा सबसे अच्छा है, प्राइस एक्शन या एसएमसी?
शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए, चाहे स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट हो या प्राइस एक्शन, दोनों ही जरूरी हैं। बात यह है कि ट्रेडिंग में हमें मुनाफा किस से हो रहा है।
किसी को प्राइस एक्शन से ट्रेड लेना पसंद है और कुछ लोगों को स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट के द्वारा हमारा मुख्य फोकस प्रॉफिट पर होना चाहिए, चाहे वह स्मार्ट मनी से आये या प्राइस एक्शन से आपको जो समझ आये उससे ट्रेड लें और उससे सीखने की कोशिश करें।
निष्कर्ष:
शेयर बाजार में प्रॉफिट बनाने के लिए आपको स्मार्ट मनी कांसेप्ट और प्राइस एक्शन को ठीक से समझना जरूरी है। यह सारी जानकारी आपको बाजार को समझने में मदद करेगी और जब हम पी.ओ.आई बनाते हैं तो बाजार में सही ट्रेड लेने में मदद मिलती है।
स्मार्ट मनी कांसेप्ट के द्वारा आप इंस्टीटूशनल के साथ ट्रेड करके अच्छा प्रॉफिट बना सकते हैं। आप दोनों को सीखकर बाजार में सफल ट्रेडर बन सकते हैं।
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